विसर्जन पाठ

नित्य नियम पूजा · पूजा · पं. जुगल किशोर
बिन जाने वा जान के, रही टूट जो कोय
तुम प्रसाद तें परम गुरु, सो सब पूरन होय ॥

पूजन विधि जानूँ नहीं, नहिं जानूँ आह्वान
और विसर्जन हूँ नहीं, क्षमा करो भगवान ॥

मंत्रहीन धनहीन हूँ, क्रियाहीन जिनदेव
क्षमा करहु राखहु मुझे, देहु चरण की सेव ॥

तुम चरणण ढिग आयके, मैं पूजूं अतिचाव
आवागमन रहित करो, रमूं सदा निज भाव ॥




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